विश्व स्ट्रोक दिवस पर CRC पटना में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, 114 लोगों ने लिया भाग

विश्व स्ट्रोक दिवस पर CRC पटना में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, 114 लोगों ने लिया भाग

पटना, 29 अक्टूबर 2026। विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर समेकित क्षेत्रीय केंद्र (CRC), पटना की ओर से गुरुवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “Every Minute Counts” (हर मिनट महत्वपूर्ण है) रही। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को स्ट्रोक की रोकथाम, शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर चिकित्सा सहायता और पुनर्वास सेवाओं के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में कुल 114 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें IGIMS अस्पताल, पटना के नर्सिंग विद्यार्थी भी शामिल रहे।

राष्ट्रीय शारीरिक दिव्यांगजन संस्थान (NILD), कोलकाता के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन CRC, पटना द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के जोखिम कारकों, बचाव के उपायों और समय पर उपचार के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का आयोजन NILD, कोलकाता के निदेशक डॉ. ललित नारायण तथा CRC, पटना की निदेशक सुश्री प्रियदर्शिनी के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का समन्वयन सुश्री कुमारी सोनम सिन्हा ने किया।

विशेषज्ञों ने स्ट्रोक की पहचान और उपचार पर दी जानकारी

कार्यक्रम में यदुराज स्किल डेवलपमेंट कॉलेज, सरैया, मुजफ्फरपुर के निदेशक डॉ. अभिजीत कुमार रंजन ने “Understanding Stroke, Early Recognition and Treatment” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों की पहचान और तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उपचार में देरी से गंभीर जटिलताओं और दीर्घकालिक दिव्यांगता का खतरा बढ़ सकता है।

वहीं, IIHER, बेउर, पटना के फिजियोथेरेपी विभाग की प्रोफेसर डॉ. जोस्नी पांडेय ने “Stroke Prevention and Management: A Multidisciplinary Approach” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने स्ट्रोक की रोकथाम, उपचार के बाद पुनर्वास और विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी सहित विभिन्न पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से मरीजों की गतिशीलता, दैनिक गतिविधियों और आत्मनिर्भरता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।

चेहरे का झुकना, हाथ में कमजोरी और बोलने में परेशानी स्ट्रोक के संकेत

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को स्ट्रोक के प्रमुख चेतावनी संकेतों के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, चेहरे का अचानक एक ओर झुकना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या बात समझने में कठिनाई, अचानक दिखाई देने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना और बिना स्पष्ट कारण के अचानक गंभीर सिरदर्द स्ट्रोक के संभावित लक्षण हो सकते हैं।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। लक्षणों के अपने आप ठीक होने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। कार्यक्रम की थीम “Every Minute Counts” के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्ट्रोक के मामलों में समय पर पहचान और त्वरित चिकित्सा हस्तक्षेप बेहद महत्वपूर्ण हैं।

स्वस्थ जीवनशैली से कम हो सकता है स्ट्रोक का जोखिम

कार्यक्रम में स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तंबाकू से दूरी और स्वस्थ वजन बनाए रखने की सलाह दी। इसके साथ ही रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराने तथा उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार जारी रखने के महत्व को रेखांकित किया गया।

नर्सिंग विद्यार्थियों की सहभागिता ने बढ़ाया कार्यक्रम का महत्व

IGIMS अस्पताल, पटना के नर्सिंग विद्यार्थियों की सहभागिता से कार्यक्रम को विशेष महत्व मिला। विद्यार्थियों को स्ट्रोक की रोकथाम, शुरुआती लक्षणों की पहचान, आपातकालीन देखभाल और पुनर्वास के संबंध में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

इस अवसर पर CRC, पटना के डॉ. अनिल कुमार, सहायक प्राध्यापक (क्लिनिकल साइकोलॉजी) एवं STTP प्रभारी; श्री राजेंद्र कुमार प्रवीण, सहायक प्राध्यापक (विशेष शिक्षा); श्री रॉबिन, सहायक प्राध्यापक (स्पीच); श्री विद्याकर कुमार, व्यावसायिक चिकित्सा (ऑक्यूपेशनल थेरेपी) के व्याख्याता तथा केंद्र के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि स्ट्रोक से प्रभावित व्यक्तियों की बेहतर देखभाल के लिए चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, स्पीच एवं भाषा विशेषज्ञों और अन्य पुनर्वास पेशेवरों का समन्वित प्रयास आवश्यक है।

जागरूकता और समय पर उपचार पर दिया गया जोर

CRC, पटना का यह जागरूकता कार्यक्रम स्ट्रोक की रोकथाम, शुरुआती लक्षणों की पहचान और पुनर्वास सेवाओं के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि स्वस्थ जीवनशैली, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर चिकित्सा सहायता और उचित पुनर्वास से स्ट्रोक के गंभीर परिणामों को कम करने में मदद मिल सकती है।

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